देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन किसी अंदरूनी नोट या आपत्ति के आधार पर सीधे किसी संस्थागत विफलता का निष्कर्ष निकालने से पहले पूरा रिकॉर्ड सामने रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया के दौरान आंतरिक विचार-विमर्श स्वाभाविक और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। उनके मुताबिक, किसी अधिकारी या संस्था के भीतर होने वाली चर्चा को अंतिम निर्णय के समान नहीं माना जाना चाहिए।
अंतिम फैसले पर ध्यान देने की बात
सीएम धामी ने कहा कि सामने आए तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि आयोग ने अंततः क्या निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या निर्णय कानून और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, किसी प्रक्रिया के दौरान सामने आई आपत्ति या आंतरिक टिप्पणी और अंतिम संस्थागत निर्णय के बीच अंतर को समझना जरूरी है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों और पूरे रिकॉर्ड को देखना चाहिए।
Dehradun: CM Dhami holds press conference regarding SIR; says questions should be asked in a democracy.
दस्तावेजों और संवैधानिक प्रक्रिया से मिलें जवाब
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछे जाने चाहिए। हालांकि, इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर तलाशे जाने चाहिए।
उन्होंने जोर दिया कि चुनाव आयोग से जुड़े किसी भी निर्णय का आकलन उसके अंतिम आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में किया जाना चाहिए।