हरिद्वार। उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से जारी बताए जा रहे फर्जी आर्म्स लाइसेंस के जरिए हथियार खरीदने के मामले में जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मोहन सिंह रावत के नाम से मुजफ्फरपुर से जारी बताया गया आर्म्स लाइसेंस जांच में फर्जी पाया गया है। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की ओर से हरिद्वार के एसएसपी को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित लाइसेंस जिले से जारी ही नहीं हुआ था।

मुजफ्फरपुर के रिकॉर्ड में नहीं मिला लाइसेंस
जांच के दौरान अधिकारियों ने मोहन सिंह रावत के नाम से जारी बताए गए आर्म्स लाइसेंस का रिकॉर्ड मुजफ्फरपुर के शस्त्र अभिलेखों में तलाशा। हालांकि, वहां लाइसेंस से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। यहां तक कि यह लाइसेंस ओडी पंजी में भी दर्ज नहीं पाया गया।
रिकॉर्ड में लाइसेंस नहीं मिलने के बाद जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया है। आशंका है कि जाली दस्तावेज तैयार कर दूसरे राज्यों से जारी बताए गए फर्जी आर्म्स लाइसेंस का इस्तेमाल उत्तराखंड में हथियार खरीदने के लिए किया गया।
नगालैंड के बाद बिहार और यूपी के लाइसेंस भी जांच के घेरे में
इससे पहले नगालैंड समेत पूर्वोत्तर राज्यों से जारी बताए गए कुछ आर्म्स लाइसेंसों के सत्यापन में भी गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं। अब बिहार और उत्तर प्रदेश से जारी बताए गए कुछ लाइसेंस भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
पुलिस को आशंका है कि फर्जी लाइसेंस, जाली दस्तावेज और कूटरचित एनओसी के जरिए हथियार खरीदने का नेटवर्क एक से अधिक राज्यों तक फैला हो सकता है।
एसएसपी के निर्देश पर शुरू हुआ सत्यापन
हरिद्वार एसएसपी के निर्देश पर दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में स्थानांतरित होकर आए आर्म्स लाइसेंसों का सत्यापन कराया जा रहा है। ऐसे लाइसेंसों के आधार पर खरीदे गए हथियार भी जांच के दायरे में हैं।
पुलिस संदिग्ध लाइसेंसों को संबंधित राज्यों के रिकॉर्ड से मिलान कर रही है। जिन लाइसेंसों में गड़बड़ी सामने आ रही है, उनके आधार पर खरीदे गए हथियारों और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
चार मामलों में 14 गिरफ्तार, 20 अवैध हथियार बरामद
फर्जी आर्म्स लाइसेंस से जुड़े मामलों में उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में अब तक चार आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने इन मामलों में 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान 20 अवैध असलहे और 372 कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लाइसेंस तैयार करने, जाली दस्तावेज और एनओसी बनाने तथा उन्हें उत्तराखंड के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका
जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने कथित तौर पर फर्जी आर्म्स लाइसेंस के साथ कूटरचित एनओसी और जाली अभिलेखों का इस्तेमाल किया। इसके बाद अंतरराज्यीय स्थानांतरण की प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग कर इन लाइसेंसों को उत्तराखंड के आर्म्स रजिस्टर में दर्ज कराया गया।
इसी कड़ी को देखते हुए पुलिस दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में स्थानांतरित होकर आए लाइसेंसों का बड़े स्तर पर सत्यापन कर रही है।
मोहन सिंह रावत का दावा भी जांच के दायरे में
मोहन सिंह रावत ने बताया था कि वह सेना में कार्यरत रहे हैं। उनके अनुसार, मुजफ्फरपुर में एनसीसी में तैनाती के दौरान उन्होंने यह आर्म्स लाइसेंस लिया था। हालांकि, मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की जांच में उनके नाम से लाइसेंस जारी होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि लाइसेंस किस माध्यम से तैयार हुआ, इसमें किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इसे उत्तराखंड में वैध रिकॉर्ड का हिस्सा कैसे बनाया गया।
SIT खंगाल रही लाइसेंस से हथियार तक की पूरी कड़ी
संदिग्ध आर्म्स लाइसेंसों की जांच के लिए गठित SIT अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। टीम लाइसेंस, एनओसी, संबंधित अभिलेखों, हथियारों की खरीद और उत्तराखंड के आर्म्स रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों की जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि फर्जी लाइसेंस तैयार करने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है और उत्तराखंड में हथियारों की खरीद के लिए इसका इस्तेमाल कितने स्तर तक किया गया।