अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लगभग दो सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन अब तक दोनों देश ईरान को झुकाने में सफल नहीं हो पाए हैं। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की रणनीति ने अमेरिका पर वैश्विक दबाव भी बढ़ा दिया है।

इसी मुद्दे पर ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए वॉशिंगटन पर कटाक्ष किया। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा हालात में अमेरिका को भारत और अन्य देशों से सहयोग मांगने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन के बदले रुख पर सवाल
विश्लेषकों के मुताबिक हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रुख में बदलाव देखने को मिला है। इससे पहले रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और आयात पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। लेकिन ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी नीति में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
रूस को मिल रहा युद्ध का लाभ
ईरानी विदेश मंत्री ने Financial Times की एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि अमेरिकी नीति में बदलाव से रूस को बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार रूसी तेल की बढ़ती मांग से रूस को प्रतिदिन करीब 15 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त लाभ हो रहा है।
The U.S. spent months on bullying India into ending oil imports from Russia. After two weeks of war with Iran, White House is now begging the world—incl India—to buy Russian crude.
Europe thought backing illegal war on Iran would win U.S. support against Russia.
Pathetic. pic.twitter.com/fbkrXpXa9P
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 13, 2026
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि:
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ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण रूस की ऊर्जा आय में बढ़ोतरी हुई है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल की बिक्री बढ़ी है।
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खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है।
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तेल टैंकरों पर हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
भारत को रूस से तेल खरीदने की अस्थायी छूट
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। इससे पहले रूस से तेल आयात को लेकर भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था और अमेरिकी प्रशासन ने भारत से होने वाले आयात पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर हमले के दौरान अमेरिका शायद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सामरिक ताकत का सही आकलन नहीं कर पाया। दुनिया के लगभग 25 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है।
युद्ध से पहले भारत अपने करीब 45 प्रतिशत तेल और गैस का आयात इसी रास्ते से करता था। अब संघर्ष लंबा खिंचने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है और कई देशों में तेल की कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है।