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Saturday, August 13, 2022

जानिए आखिर कौन है रोज़ाना 50 किलोमीटर दौड़ने वाले पिता-पुत्र?

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उत्तराखंड में आज के दौर में जहाँ लोग भारत के भिन्न-भिन्न पदों पर पहुँच कर प्रदेश की शोभा बढ़ा रहें हैं। वहीँ राज्य में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जिनके जज़्बे और हौसलों के आगे असफलता भी नाकाम हो जाती है। वह राज्य के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए मिसाल कायम करते है। ऐसे ही उत्तराखंड न्यूज़ एक्सप्रेस की टीम मिली एक पिता-पुत्र की जोड़ी से जिन्होंने दौड़ के मैदान में ना सिर्फ अपनी अलग पहचान बनायीं है बल्कि कुछ ऐसे कीर्तिमान भी रचने जा रहें हैं जो की लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज होने जा रहा है।  यह पिता-पुत्र का परिचय अजय यादव और विकास यादव है जो कि बल्लूपुर चौक के नज़दीक सिनर्जी हॉस्पिटल के पास रहते है। वैसे तो यादव परिवार A.C रिपेयर का काम करता है लेकिन दौड़ के क्षेत्र में जो रिकॉर्ड इन्होने बनाये हैं वो बनाने सबके बस की बात नहीं है।

इसके बाद जब हम यादव ऐसी रिपेयर शॉप पर पहुंचे तब हमारी मुलाकात वहा विकास यादव से हुई जिन्होंने हमे बताया कि वह 07 जुलाई को लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना रहे हैं , जिसके लिए उन्हें रोज़ाना 50 किमी दौड़ना होता है। फ़िलहाल तो विकास को अपना वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सपना रोकना पड़ा क्यूंकि उनके पैर पर इंजरी हो गयी जिसके कारण डॉक्टर ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी ही मगर इनके पिता अभी भी जी जान से वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तरफ बढ़ रहे है। आपको जान कर हैरानी होगी कि यह दोनों पिता पुत्र 50 किमी से भी ज़्यादा दौड़ रहे हैं। वहीँ विकास ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में ही 50 दिन दौड़ने का रिकॉर्ड बनाया हैं। साथ ही विकास से हुई बातचीत के दोरान उन्होंने हमे बताया की उनके पिता अजय यादव ने देहरादून से चंडीगढ़, देहरादून से दिल्ली और देहरादून से हरयाणा तक दौड़ का सफ़र भी तय किया हुआ है। आपको बता दे की सिर्फ इतना ही नहीं 54 वर्षीय अजय यादव के नाम 24 घंटें तक लगातार दौड़ने का रिकॉर्ड भी शामिल है।

इसी बिच विकास से बातचीत के बाद हम उनके पिता अजय यादव से मिलने के लिए वही रवाना हो गए जहाँ वो रनिंग कर रहे थे। तक़रीबन 20 मिनट की दुरी पर घने जंगलो के बिच हमारी मुलाकात अजय यादव जी से हो गई। जिसके बाद हमने उनसे उनके सफ़र के बारे में बातचीत की और उनसे जाना की आखिर क्यों उन्होंने दौड़ने का फैसला लिया। यादव जी ने हमे बताया की तक़रीबन 2010 में उन्हें अटैक आया था जिसके बाद से ही उनका सारा जीवन दवाई और बिस्तर में ही कट रहा थी। तभी एक दिन अचानक उन्हें ख्याल आया कि वो अपना सारा जीवन ऐसे ही व्यतीत नहीं करेंगे। जिसके बाद उन्होंने दौड़ने का फैसला लिया और तब से लेकर अबतक वह नहीं रुके। आपको बता दे कि यादव जी के साथ और भी लोग वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की इस रेस में शामिल है मगर यादव जी ने एक 23 वर्ष नोजवान को करीबन 1000 किमी से पछाड़ रखा है। साथ ही अपने आगे के प्लान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा की अब वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक पेदल सफ़र करने की तयारी कर रहे है।

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