
ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने इस साल की शुरुआत में ही बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने इस कदम को कठिन, लेकिन जरूरी फैसला बताया था। यूरोपीय देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाने की बढ़ती चर्चा के बीच ग्रीस का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1 जनवरी 2027 से लागू होगा प्रतिबंध
नए कानून के अनुसार, ग्रीस में 15 साल से कम उम्र के बच्चे प्रतिबंध के दायरे में आने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसके लिए कंपनियों को ऐसे उम्र सत्यापन तंत्र अपनाने होंगे, जो विश्वसनीय हों और परिस्थितियों के अनुरूप काम करें।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित उम्र से कम बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक आसानी से पहुंच न सकें। नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी अहम होगी, क्योंकि केवल उपयोगकर्ताओं की ओर से दर्ज की गई जन्मतिथि के आधार पर उम्र की पुष्टि करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
उम्र की जांच के लिए सरकारी ऐप्स की मदद
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती उनकी उम्र की सही पहचान करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रीस सरकार डिजिटल पहचान से जुड़े अपने ऐप्स का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है।
ग्रीस के डिजिटल गवर्नेंस और एआई मंत्री दिमित्रिस पापास्तेरगिउ के अनुसार, उम्र सत्यापन के लिए Kids Wallet और Gov.gr Wallet जैसे सरकारी ऐप्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इन ऐप्स के माध्यम से उपयोगकर्ता की उम्र की पुष्टि करने के लिए डिजिटल एज टोकन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य संबंधित प्लेटफॉर्म को उम्र की आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है, जबकि व्यक्ति की अन्य निजी जानकारियों को साझा करने की जरूरत कम से कम रहे।
सरकार का जोर ऐसी तकनीक विकसित करने पर है, जिससे उम्र की पुष्टि भी हो सके और नागरिकों की डिजिटल निजता भी सुरक्षित रहे।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर
डिजिटल गवर्नेंस और एआई मंत्री दिमित्रिस पापास्तेरगिउ ने कहा कि बच्चों का इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बढ़ता जुड़ाव सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। उनके मुताबिक, केवल एक आदर्श यूरोपीय कानून का इंतजार करते रहना आसान विकल्प हो सकता था, लेकिन सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कदम उठाने की जरूरत है।
इस पहल के पीछे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख कारणों में शामिल है। सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों की नींद, पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कई देशों में बहस जारी है।
हालांकि, ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने के लिए उम्र सत्यापन की विश्वसनीयता, बच्चों की निजता और नियमों के व्यावहारिक क्रियान्वयन जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।
यूरोप में सोशल मीडिया नियमन पर बढ़ रही चर्चा
ग्रीस का यह कदम बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था बनाने की व्यापक बहस के बीच आया है। यूरोपीय संघ में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, नाबालिगों की सुरक्षा और उम्र सत्यापन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
ग्रीस की नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सोशल मीडिया कंपनियां उम्र की जांच किस तरह करती हैं और प्रतिबंध को लागू करने के लिए तकनीकी व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।
कुल मिलाकर, ग्रीस का यह कानून बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र आधारित प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम है। इसके क्रियान्वयन से यह भी पता चलेगा कि डिजिटल निजता को बनाए रखते हुए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी डिजिटल पहचान प्रणालियों का इस्तेमाल कितना कारगर साबित होता है।