देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की कमी से प्रभावित होने की आशंका है। प्रदेश में विशेष शिक्षकों के स्वीकृत 285 पदों में से 200 से अधिक पद खाली बताए जा रहे हैं। ऐसे में दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, मार्गदर्शन और व्यक्तिगत सहयोग उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ गई है। रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की मांग भी उठने लगी है।


380 से घटाकर 285 किए गए थे पद
जानकारी के अनुसार, शासन ने 27 सितंबर 2022 को प्राथमिक विद्यालयों में विशेष शिक्षकों के 380 पद सृजित किए थे। इसके बाद 28 मई 2025 को जारी शासनादेश में संशोधन करते हुए पदों की संख्या घटाकर 285 कर दी गई।
हालांकि, संशोधित स्वीकृत पदों के सापेक्ष भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इसका असर प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेष शिक्षकों की उपलब्धता पर पड़ रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को नियमित शैक्षणिक सहयोग देने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती जरूरी मानी जा रही है।
हरिद्वार से पौड़ी तक विशेष शिक्षकों की कमी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में विशेष शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं।
- हरिद्वार: 18 स्वीकृत पदों में से 2 भरे, 16 रिक्त।
- नैनीताल: उपलब्ध विवरण के अनुसार, 3 पदों पर नियुक्ति और 21 पद रिक्त।
- उत्तरकाशी: 18 पदों में से 8 भरे, 10 रिक्त।
- पौड़ी गढ़वाल: 46 पदों में से 8 भरे, 38 रिक्त।
- चमोली: 27 पदों में से 6 भरे, 21 रिक्त।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जिलों में स्वीकृत पदों की तुलना में विशेष शिक्षकों की उपलब्धता काफी कम है। अन्य जिलों में भी रिक्तियों की समस्या बनी हुई है।
विशेष शिक्षकों की कमी से समावेशी शिक्षा प्रभावित होने की चिंता
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की भूमिका अहम होती है। ऐसे शिक्षक बच्चों की सीखने की क्षमता, शैक्षणिक जरूरतों और विकास के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों का इस्तेमाल करते हैं।
शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को आवश्यक मार्गदर्शन और व्यक्तिगत सहयोग उपलब्ध कराने में कठिनाइयां आ सकती हैं। इससे समावेशी शिक्षा के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती भी बढ़ सकती है।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि केवल पद सृजित करना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए रिक्त पदों पर नियुक्तियां करना और स्कूलों में जरूरी शैक्षणिक सहयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
शासन से वार्ता के बाद शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के अनुसार, विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से वार्ता की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासनादेश जारी होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ऐसे में अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी और रिक्त पदों पर नियुक्तियां कब तक हो पाएंगी, यह स्पष्ट होना बाकी है। वहीं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जल्द नियुक्तियां किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।