पिथौरागढ़। जाड़े के मौसम की शुरुआत से पहले हुई भारी बर्फबारी ने आदि कैलाश और व्यास घाटी का नजारा बदल दिया है। जहां बर्फ की सफेद चादर ने पर्यटकों और आदि कैलाश यात्रियों के चेहरे पर खुशी ला दी है, वहीं स्थानीय ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आदि कैलाश, नाभीढांग और कुटी क्षेत्र में करीब दो से पांच फीट तक बर्फ जम चुकी है। भारी बर्फबारी के चलते कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला यात्रा मार्ग फिलहाल बंद हो गया है।

वहीं, कुटी के करीब 100 ग्रामीण घोड़े-खच्चरों के साथ करीब 20 किलोमीटर पैदल सफर तय कर रविवार देर शाम किसी तरह गांव लौटे।
आदि कैलाश में चार से पांच फीट बर्फ
सोमवार को मौसम साफ होने के बाद तेज धूप खिली तो करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित व्यास घाटी बर्फ की सफेद चादर में ढकी नजर आई। आदि कैलाश यानी ज्योंलिंगकांग क्षेत्र में पिछले दो दिनों में करीब चार से पांच फीट बर्फ गिरने की जानकारी सामने आई है।
ग्राम प्रधान नगेंद्र कुटियाल और वाहन स्वामी गुलाब कुटियाल के अनुसार, भारी बर्फबारी के कारण कुटी से आदि कैलाश जाने वाला मार्ग बंद हो गया है। सड़क खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम काम में जुटी है।
स्थानीय निवासी सुप्पो सिंह ने बताया कि आदि कैलाश क्षेत्र में लगातार बर्फबारी के कारण करीब 100 ग्रामीण घोड़े-खच्चरों के साथ लगभग 20 किलोमीटर पैदल चलकर रविवार देर शाम कुटी पहुंचे।
धूप खिलते ही पर्यटकों को आकर्षित कर रही घाटी
सोमवार को मौसम साफ होने और धूप निकलने के बाद व्यास घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बन रहा था। नाभीढांग में करीब दो फीट बर्फ दर्ज की गई है, जबकि कुटी गांव भी बर्फ की सफेद चादर से ढका हुआ है।
केएमवीएन नाभीढांग के प्रबंधक नरेंद्र बिष्ट ने बताया कि मौसम साफ होने के बाद क्षेत्र में धूप खिली और मौसम सुहाना हो गया। बर्फबारी के बाद अब तक काले रंग में दिखाई देने वाला ओम पर्वत भी अपने प्राकृतिक बर्फीले स्वरूप में नजर आने लगा है।
गुंजी से नाभीढांग तक सड़क खुली
भारी बर्फबारी के बावजूद गुंजी से कालापानी और नाभीढांग तक सड़क खुली होने के कारण इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारू बताई जा रही है।
आदि कैलाश क्षेत्र में फिलहाल सुरक्षा कर्मियों के साथ करीब 10 होटल संचालकों के मौजूद होने की जानकारी है। हालांकि कुटी से आदि कैलाश का मार्ग बंद होने से यात्रा गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
बर्फबारी से फसलों को नुकसान
भारी बर्फबारी ने स्थानीय किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कुटी गांव में करीब दो फीट बर्फ गिरने से आलू, राजमा, मटर और फाफर की फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
स्थानीय निवासी कुंवर सिंह कुटियाल और चेत सिंह कुटियाल ने बताया कि फसलों को हुए नुकसान से ग्रामीण निराश हैं। ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने प्रशासन से कृषि और उद्यान विभाग की टीम को क्षेत्र में भेजकर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
पांच फीट तक बर्फ, आवाजाही में बढ़ी मुश्किल
आदि कैलाश और नाभीढांग क्षेत्र में कई स्थानों पर पांच फीट तक बर्फ जमने से स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। ग्रामीण लाठी और लकड़ियों के सहारे बर्फ के बीच रास्ता तय कर रहे हैं।
अधिकांश ग्रामीण ठंड और भारी बर्फबारी के कारण घरों में रहने को मजबूर हैं। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को भी बर्फ के बीच आवाजाही करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।