हरिद्वार: करीब दो दशक पहले देश को झकझोर देने वाला निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद 2005-06 में नोएडा के निठारी में हुई बच्चों और महिलाओं की मौतों से जुड़े पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं। खास बात यह है कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ निठारी से जुड़े मामलों में दोषसिद्धियां अब कायम नहीं हैं।

निठारी कांड कैसे सामने आया था?
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और आसपास के क्षेत्र से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला सामने आया था। इसके बाद कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं से इसका संबंध सामने आया और देशभर में सनसनी फैल गई।
पंढेर के घर में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने वाले सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। बाद में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की। अलग-अलग मुकदमों में कोली को दोषी ठहराया गया और उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी।
2023 में हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में सुरेंद्र कोली और दो मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी कर दिया था। अदालत ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों को दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं माना था।
इसके बाद मामले की तस्वीर और बदली। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में संबंधित बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा। इस तरह निठारी से जुड़े जिन मामलों में पहले कोली और पंढेर को दोषी ठहराया गया था, उनमें उनकी दोषसिद्धियां अंतिम रूप से कायम नहीं रहीं।
हरिद्वार में कैसे हुई सुरेंद्र कोली की मौत?
सुरेंद्र कोली को 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में अपनी चाय की दुकान के अंदर मृत पाया गया। पुलिस के मुताबिक वह फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने मौत के कारण की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच जारी है।
कोली की मौत के बाद निठारी कांड से जुड़े सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। एक पीड़ित के पिता ने उसकी मौत को आत्महत्या मानने पर सवाल उठाते हुए हत्या का आरोप लगाया है और जांच की मांग की है। हालांकि, यह परिजन की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निठारी कांड में अब क्या स्थिति है?
निठारी कांड में बरामद मानव अवशेषों और कई लोगों के लापता होने की घटनाओं ने देश को लंबे समय तक झकझोर कर रखा। लेकिन अदालतों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोली और पंढेर के खिलाफ संबंधित मामलों में दोषसिद्धियां कायम नहीं रह सकीं।
यही वजह है कि आज भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है—निठारी में हुई उन मौतों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार व्यक्ति कौन था?
हालांकि, सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत को निठारी कांड से सीधे जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। उनकी मौत की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
करीब 20 साल बाद भी सवाल बरकरार
निठारी कांड की जांच, मुकदमों और अदालतों के फैसलों का सफर करीब दो दशक लंबा रहा। इस दौरान मामले में कई मोड़ आए—मौत की सजाएं, अपीलें, बरी होने के फैसले और अंततः आरोपियों की रिहाई।
अब सुरेंद्र कोली की मौत ने इस पुराने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन इस घटना के आधार पर निठारी कांड के संबंध में कोई नया निष्कर्ष निकालने से पहले हरिद्वार पुलिस की जांच और उपलब्ध आधिकारिक साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी होगा।