श्रीनगर: श्रीनगर नगर निगम की मेयर आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी के दोबारा भाजपा में शामिल होने के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नगर निगम चुनाव में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने और जीत दर्ज करने के करीब डेढ़ साल बाद दोनों की पार्टी में वापसी को सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।

आरती भंडारी और लखपत भंडारी की भाजपा में वापसी के बाद सोशल मीडिया से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। समर्थक इसे भाजपा की मजबूती के तौर पर देख रहे हैं, जबकि विरोधी खेमे की ओर से इसे लेकर सवाल और आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आने लगे हैं।
टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़ी थीं चुनाव
नगर निगम चुनाव से पहले आरती भंडारी और लखपत भंडारी भाजपा से जुड़े हुए थे। मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद आरती भंडारी पार्टी से टिकट की दावेदार थीं, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
आरती भंडारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की और श्रीनगर की मेयर बनीं। वहीं पार्टी से अलग राह चुनने के बाद भाजपा ने लखपत भंडारी के खिलाफ छह वर्ष के निष्कासन की कार्रवाई की थी।
अब राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और दोनों की दोबारा भाजपा में वापसी हो गई है।
नगर निगम में भाजपा की स्थिति मजबूत
आरती भंडारी और लखपत भंडारी के साथ कुछ पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से नगर निगम की राजनीति में भी पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है। खास बात यह है कि नगर निगम चुनाव के दौरान जो नेता अलग-अलग राजनीतिक खेमों में थे, वे अब एक ही मंच पर नजर आ रहे हैं।
इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के भीतर भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पुराने कार्यकर्ताओं और पार्टी के टिकट के दावेदारों के बीच नई एंट्री को लेकर किस तरह का तालमेल बनता है, इस पर आने वाले दिनों में सबकी नजर रहेगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
भाजपा में वापसी के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। समर्थक इसे संगठन के विस्तार और पार्टी की मजबूती से जोड़ रहे हैं, जबकि विपक्षी और राजनीतिक विरोधी इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी लोग इस घटनाक्रम को केवल नगर निगम की राजनीति तक सीमित नहीं मान रहे हैं। चर्चा अब 2027 के विधानसभा चुनाव तक पहुंच गई है और बदले समीकरणों के संभावित असर को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा घटनाक्रम
श्रीनगर की राजनीति में आरती भंडारी और लखपत भंडारी की वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है और इस स्तर पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल इतना जरूर है कि दोनों की भाजपा में वापसी ने श्रीनगर की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में पार्टी संगठन में उन्हें क्या जिम्मेदारी मिलती है और पुराने नेताओं के साथ किस तरह का राजनीतिक तालमेल बनता है, इससे इस वापसी के वास्तविक प्रभाव की तस्वीर और साफ होगी।
बगावत से भाजपा में वापसी तक का सफर
नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा से जुड़े रहने, टिकट न मिलने के बाद बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने और फिर जीत हासिल करने के बाद अब दोबारा पार्टी में लौटने तक आरती भंडारी और लखपत भंडारी का राजनीतिक सफर लगातार चर्चा में रहा है।
ऐसे में बुधवार को हुई उनकी भाजपा में वापसी को महज राजनीतिक सदस्यता नहीं, बल्कि श्रीनगर की बदलती सियासी तस्वीर के महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में यह नई राजनीतिक साझेदारी स्थानीय राजनीति और भाजपा संगठन को किस दिशा में ले जाती है।