देहरादून: ऋषिकेश में आठ वर्षीय बच्ची से यौन अपराध के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर आरोपी को दो साल का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (पॉक्सो), देहरादून की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामले में घटना के करीब एक साल के भीतर फैसला आया है।
लापता बच्ची की तलाश के दौरान सामने आया था मामला
मामला 1 जुलाई 2025 का है। ऋषिकेश निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी आठ वर्षीय बेटी लापता है। परिवार और स्थानीय लोगों ने बच्ची की तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान चुंगी क्षेत्र स्थित एक सार्वजनिक शौचालय के पास से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचे लोगों ने अंदर एक व्यक्ति को देखा। बच्ची ने उसके खिलाफ यौन अपराध किए जाने की बात बताई।
इसके बाद लोगों ने आरोपी को पकड़कर बच्ची के पिता और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने 2 जुलाई 2025 को मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद 29 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई और 27 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई आरोपी की पहचान
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें पीड़िता, उसके पिता, स्कूल के प्रधानाचार्य/हेड टीचर, चिकित्सक, विवेचक और पुलिसकर्मी शामिल रहे।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता ने घटना को लेकर बयान दिया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपी की पहचान भी की।
बच्ची की उम्र साबित करने के लिए स्कूल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र अदालत के समक्ष पेश किए गए। रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी जन्मतिथि 26 अप्रैल 2017 थी और घटना के समय वह करीब आठ वर्ष की थी।
DNA मैच नहीं हुआ, फिर भी अदालत ने माना दोषी
मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर चोट के निशान नहीं पाए गए थे। फोरेंसिक जांच में उसके कपड़ों से मिले DNA का आरोपी के DNA से मिलान भी नहीं हुआ।
इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करते हुए आरोपी को दोषी माना। अदालत ने पीड़िता की गवाही की निरंतरता और विश्वसनीयता समेत अन्य साक्ष्यों को भी ध्यान में रखा।
BNS और POCSO की धाराओं में दोषसिद्धि
अदालत ने आरोपी को BNS की धारा 137(2) के आरोप से बरी कर दिया। वहीं BNS की धारा 65(2) और POCSO अधिनियम की धारा 5(ड)/6 के तहत दोषी करार दिया।
BNS की धारा 65(2) के तहत 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। POCSO की संबंधित धाराओं के तहत भी 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड का आदेश दिया गया।
अदालत ने दोनों सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया है।
पीड़िता को मिलेगा 3 लाख रुपये का प्रतिकर
अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने का भी आदेश दिया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून को नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।