रुद्रपुर: ऊधमसिंह नगर में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल कॉलेज परियोजना निर्धारित समयसीमा के वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। करीब साढ़े पांच साल पहले शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अब तक लगभग 65 प्रतिशत ही निर्माण कार्य पूरा हो पाया है। निर्माण में देरी के चलते कॉलेज को अभी तक नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की मान्यता नहीं मिल सकी है, जिससे एमबीबीएस पाठ्यक्रम की शुरुआत और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

धीमी रफ्तार से निर्माण पर उठ रहे सवाल
मेडिकल कॉलेज के बहुमंजिला एकेडमिक ब्लॉक, अस्पताल भवन और छात्रावास सहित कई प्रमुख संरचनाएं अभी अधूरी हैं। परियोजना की प्रगति रिपोर्ट में नियमित प्रगति दर्शाई जा रही है, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।
सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार की लापरवाही और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण परियोजना लगातार विलंब का शिकार हुई है। इसका असर क्षेत्र के उन छात्रों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें मेडिकल शिक्षा के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर से NMC की मान्यता रुकी
निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने के कारण मेडिकल कॉलेज NMC के निरीक्षण में निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी के चलते कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी, जिससे MBBS की प्रस्तावित सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई।
एक महीने में भवन हैंडओवर का दावा
निर्माण कार्य में हो रही देरी पर बढ़ते दबाव के बीच जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने कार्य में तेजी लाने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण स्थल पर श्रमिकों की संख्या बढ़ाई गई है और आवश्यक निर्माण सामग्री की आपूर्ति भी तेज कर दी गई है।
निर्माण एजेंसी ने दावा किया है कि शेष कार्य एक महीने के भीतर पूरा कर भवन मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
प्राचार्य ने निर्माण एजेंसी से मांगा जवाब
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया। बैठक के दौरान उन्होंने परियोजना पूरी होने की स्पष्ट समयसीमा पूछी। एजेंसी ने एक माह के भीतर कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया।
डॉ. उषा रावत ने कहा कि कॉलेज भवन जल्द तैयार होना आवश्यक है, ताकि आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कराई जा सकें और NMC से मान्यता के लिए दोबारा आवेदन भेजा जा सके।
फैकल्टी की कमी भी बनी बड़ी चुनौती
मेडिकल कॉलेज में केवल भवन ही नहीं, बल्कि फैकल्टी की कमी भी बड़ी बाधा बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 13 फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं।
NMC के मानकों के अनुसार 100 MBBS सीटों के लिए 50 से अधिक शिक्षकों के साथ विभिन्न विभागों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति आवश्यक होती है। इसके अलावा अस्पताल के वार्ड, प्रयोगशालाएं और छात्रावास भी पूरी तरह तैयार होना जरूरी है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने जताई उम्मीद
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने कहा कि निर्माण कार्य की लगातार निगरानी की जा रही है और एजेंसी को जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, विधायक शिव अरोरा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को NMC से मान्यता दिलाने और निर्माण कार्य समय पर पूरा कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मेडिकल कॉलेज में देरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। पूर्व विधायक तिलक राज बेहड़ ने निर्माण कार्य में देरी के लिए वर्तमान सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि परियोजना के लिए स्वीकृत धनराशि का समय पर उपयोग नहीं किया गया।
वहीं, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि केवल घोषणाएं करने से मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फैकल्टी की भारी कमी के कारण कॉलेज को NMC की मान्यता नहीं मिल पा रही है।
मानकों को पूरा करने की तैयारी
प्राचार्य डॉ. उषा रावत ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में भवन निर्माण और स्टाफ की कमी दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही सभी आवश्यक मानक पूरे होंगे, NMC को मान्यता के लिए दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा।