देहरादून: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जनपद ग्रेडिंग सूचकांक (District Grading Index) 2025-26 में उत्तराखंड के जिलों के प्रदर्शन की तस्वीर सामने आई है। इस रिपोर्ट में चमोली ने राज्य में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है, जबकि हरिद्वार अंतिम पायदान पर रहा। शिक्षा व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं, सीखने के परिणाम और प्रशासनिक कार्यप्रणाली समेत विभिन्न मानकों के आधार पर जिलों का मूल्यांकन किया गया है।
600 अंकों के पैमाने पर तैयार इस रिपोर्ट में चमोली को 352 अंक मिले हैं, जबकि हरिद्वार को 310 अंक प्राप्त हुए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जिलों के प्रदर्शन का आकलन कर यह ग्रेडिंग जारी करता है।

छह प्रमुख मानकों पर हुआ मूल्यांकन
जनपद ग्रेडिंग सूचकांक में जिलों का मूल्यांकन छह प्रमुख क्षेत्रों के आधार पर किया गया है। इनमें शामिल हैं—
- लर्निंग आउटकम (Learning Outcomes)
- प्रभावी कक्षा संचालन
- विद्यालयों का बुनियादी ढांचा एवं सुविधाएं
- स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण
- डिजिटल लर्निंग
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गुणवत्ता
इन मानकों के आधार पर जिलों को विभिन्न श्रेणियों—उत्कर्ष, उत्तम, प्रचेष्ठा और आकांक्षी—में वर्गीकृत किया जाता है।
चमोली के प्रदर्शन पर जताई खुशी
रिपोर्ट में राज्य में पहला स्थान मिलने पर चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने इसे जिले के शिक्षा विभाग, शिक्षकों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।
उत्तराखंड के जिलों की रैंकिंग
| रैंक | जनपद | प्राप्त अंक |
|---|---|---|
| 1 | चमोली | 352 |
| 2 | पिथौरागढ़ | 344 |
| 3 | बागेश्वर | 343 |
| 4 | देहरादून | 340 |
| 5 | पौड़ी गढ़वाल | 335 |
| 6 | अल्मोड़ा | 327 |
| 7 | नैनीताल | 326 |
| 8 | चंपावत | 324 |
| 9 | टिहरी गढ़वाल | 322 |
| 10 | उत्तरकाशी | 317 |
| 11 | रुद्रप्रयाग | 317 |
| 12 | ऊधम सिंह नगर | 313 |
| 13 | हरिद्वार | 310 |
(स्रोत: डायट चमोली / केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जनपद ग्रेडिंग सूचकांक रिपोर्ट 2025-26)
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि राज्य के विभिन्न जिलों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में प्रदर्शन का अंतर अभी भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछड़े जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए लक्षित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।