रुद्रपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर स्थित एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पेट्रोल भरवाने के कुछ ही समय बाद दर्जनों दोपहिया और अन्य वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए। इससे नाराज वाहन चालकों ने पेट्रोल पंप पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और पेट्रोल में मिलावट अथवा इथेनॉल की अधिक मात्रा होने का आरोप लगाया। मामले ने तूल पकड़ने पर जिला पूर्ति विभाग ने जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई वाहन चालकों ने पेट्रोल भरवाने के कुछ मिनट बाद ही अपनी गाड़ियों में तकनीकी दिक्कत महसूस की। कुछ ही दूरी तय करने के बाद वाहन बंद हो गए और स्टार्ट नहीं हुए। जब एक के बाद एक कई वाहनों में समान समस्या सामने आई तो लोगों का संदेह सीधे पेट्रोल की गुणवत्ता पर गया। इसके बाद प्रभावित उपभोक्ता बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया।

विवाद के दौरान पेट्रोल पंप के सेल्स मैनेजर ने कुछ वाहनों के टैंक से पेट्रोल निकलवाकर लोगों के सामने जांच के लिए प्रस्तुत किया। वाहन चालकों का आरोप है कि अलग-अलग वाहनों से निकाले गए पेट्रोल का रंग अलग-अलग दिखाई दे रहा था, जिससे ईंधन की गुणवत्ता पर सवाल और गहरे हो गए। उनका कहना था कि यदि पेट्रोल मानकों के अनुरूप होता तो एक साथ इतने वाहनों में खराबी नहीं आती।

हालांकि, पेट्रोल पंप प्रबंधन ने मिलावट के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि कुछ वाहनों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण तकनीकी समस्या उत्पन्न हो सकती है। वहीं, स्थिति को शांत करने के लिए प्रबंधन ने प्रभावित उपभोक्ताओं के वाहनों से निकाले गए पेट्रोल की पूरी राशि वापस कर दी। इसके बावजूद वाहन चालकों ने स्पष्ट कहा कि केवल पैसा लौटाना पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

घटना के बाद जिले में पेट्रोल की गुणवत्ता, ईंधन आपूर्ति प्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर नियमित रूप से ईंधन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जिला पूर्ति अधिकारी विनोद तिवारी ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी मिलने के बाद विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल के नमूनों की जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल प्रभावित उपभोक्ताओं को पेट्रोल की राशि लौटा दी गई है, लेकिन अब सभी की निगाहें जिला पूर्ति विभाग की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।