देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए वाहन स्क्रैप नीति को और प्रभावी बना दिया है। परिवहन विभाग ने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने और समान श्रेणी के नए वाहनों के पंजीकरण पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत तक की छूट देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार संत ने अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके साथ ही यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।

अधिसूचना के अनुसार, गैर-परिवहन और परिवहन श्रेणी के पुराने वाहनों को किसी पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र पर स्क्रैप कराने के बाद यदि वाहन स्वामी समान श्रेणी का नया वाहन खरीदता है, तो उसे रजिस्ट्रेशन के समय मोटर व्हीकल टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।
परिवहन विभाग पहले से ही बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के वाहनों के लिए स्क्रैप नीति लागू कर रहा है। इस योजना के तहत बीएस-3 और बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों को स्क्रैप करने पर नए वाहन की खरीद पर 15 प्रतिशत टैक्स छूट और निजी वाहनों को स्क्रैप करने पर 25 प्रतिशत टैक्स छूट दी जाती है। अब विभाग ने इस योजना के दायरे का विस्तार करते हुए बीएस-1 और बीएस-2 श्रेणी के वाहनों को भी इसमें शामिल कर लिया है।

नई व्यवस्था के तहत बीएस-1 श्रेणी के सभी वाहन और बीएस-2 श्रेणी के सभी मध्यम एवं भारी मालवाहक तथा यात्री वाहनों को स्क्रैप कराने पर समान श्रेणी के नए वाहन की खरीद पर 50 प्रतिशत टैक्स छूट दी जाएगी। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में वर्तमान में बीएस-1 श्रेणी के 14,789 वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें 785 वाणिज्यिक और 14,004 निजी वाहन शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य में बीएस-2 श्रेणी के 2,888 मध्यम और भारी मालवाहक वाहन तथा 494 मध्यम और भारी यात्री वाहन पंजीकृत हैं। इस तरह बीएस-2 श्रेणी के कुल 3,382 वाहनों को स्क्रैप करने पर वाहन स्वामियों को 50 प्रतिशत टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि बीएस-1 और बीएस-2 श्रेणी के वाहनों को शामिल करने का उद्देश्य अधिक से अधिक पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों को सड़कों से हटाना है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बीएस-1 के सभी वाहन और बीएस-2 के मध्यम व भारी वाहन स्क्रैप कराने पर नए वाहन के पंजीकरण में 50 प्रतिशत टैक्स छूट दी जाएगी।
अधिसूचना के अनुसार, वाणिज्यिक वाहनों को अगले आठ वर्षों तक और निजी वाहनों को अगले 15 वर्षों तक टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएस-3 और बीएस-4 वाहनों के लिए पहले से लागू छूट व्यवस्था यथावत जारी रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नए वाहनों की बिक्री और परिवहन व्यवस्था में भी सुधार होगा।