पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिकों और उनके परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सैनिक की मृत्यु छुट्टी के दौरान सेरेब्रल हेमरेज जैसी बीमारी से होती है, तो उसे सैन्य सेवा के कारण हुई मृत्यु माना जाएगा। ऐसी स्थिति में मृतक सैनिक की मौत को ऑन-ड्यूटी के समान मानते हुए उसके परिवार को विशेष पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलेगा।

पूरा मामला:
यह फैसला पंजाब की रहने वाली सुमन के मामले में आया है। उनके पति भारतीय सेना में कार्यरत थे और छुट्टी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के चलते सेरेब्रल हेमरेज से उनका निधन हो गया था। दिसंबर 2022 में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) की चंडीगढ़ पीठ ने सुमन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें विशेष पारिवारिक पेंशन देने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह तर्क दिया कि जवान अपनी इच्छा से छुट्टी पर गया था, इसलिए उसकी मृत्यु को सेवा से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
केंद्र सरकार की दलील खारिज:
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह तय करना कि सैनिक एक्टिव ड्यूटी पर था या कैजुअल लीव पर, कानूनी रूप से अप्रासंगिक है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मृत्यु के समय सैनिक सेवा में था और छुट्टी पर होने के बावजूद वह सैन्य अनुशासन व सेवा शर्तों के अधीन ही रहता है।
सेना की नौकरी सामान्य नहीं:
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सेना की नौकरी किसी सामान्य सरकारी नौकरी जैसी नहीं होती। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनाती, लंबे समय तक परिवार से दूर रहना और अत्यधिक दबाव वाले ऑपरेशन सैनिकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। यही तनाव उच्च रक्तचाप और सेरेब्रल हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि भर्ती के समय सैनिक पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन सेवा के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के कारण उसका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ।
पेंशन से जुड़ा फैसला बरकरार:
हाईकोर्ट ने AFT के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि वह न तो तथ्यों के खिलाफ है और न ही कानून के सिद्धांतों के विरुद्ध। इसलिए उसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने माना कि सैनिक द्वारा देश सेवा के दौरान झेला गया मानसिक और शारीरिक तनाव छुट्टी के दिनों में भी समाप्त नहीं होता।
क्या है विशेष पारिवारिक पेंशन:
विशेष पारिवारिक पेंशन उस स्थिति में दी जाती है, जब सैनिक की मृत्यु सैन्य सेवा या सेवा के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के कारण होती है। इसमें मृतक सैनिक के अंतिम वेतन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाता है, जबकि सामान्य पारिवारिक पेंशन लगभग 30 प्रतिशत होती है। यह फैसला सैनिक परिवारों को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।