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उत्तराखंड में बड़े भूकंप का खतरा, इन संकेतों से बढ़ी चिंता, मंगलवार रात इसी कारण लगे थे झटके

उत्तराखंड में आने वाले समय में बड़ा भूकंप (Earthquake in Uttarakhand) आ सकता है। कई भू वैज्ञानिकों ने इसका दावा किया है। वैज्ञानिकों ने बताया है मंगलवार की रात और बुधवार की सुबह आया भूकंप महज एक फिल्मी ट्रेलर जैसा था। आने वाले समय में उत्तराखंड में बड़े भूकंप का खतरा मंडरा रहा है, जिसकी तीव्रता 6 से लेकर 8 रिक्टर स्केल तक हो सकती है।

भूवैज्ञानिक उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से जोन 5 में रखते हैं। लिहाजा, भूकंप आने की आशंका के वैज्ञानिकों के नए दावों से चिंता बढ़ गई है। कारण भी है क्योंकि उत्तराखंड मुख्य सेंट्रल थ्रस्ट पर बसा है। यहीं से हिमालयन बेल्ट की फाल्ट लाइन भी गुजरती है। इसी कारण रह रहकर भूकंपीय झटके महसूस होते रहते हैं। मगर सोमवार को गढ़वाल आैर मंगलवार की रात और फिर बुधवार सुबह पूरे कुमाऊं और नेपाल में जिस तरह के झटकों ने लोगों को दहशत में डाली, उससे वैज्ञानिकों के इन दावों को बल मिला है।

इसी को लेकर कानुपर आइआइटी (IIT Kanpur) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर और जियोसाइंस इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ प्रो. जावेद एन मलिक और उनकी टीम का एक शोध सामने आया है। उनकी टीम ने जीपीआर, जीपीएस और सैटेलाइट की मदद से पहाड़ी और तराई के क्षेत्र में आए भूकंप के निशान तलाशे हैंऔर उस अाधार पर सर्वे के बाद जारी उनकी शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तराखंड में 7.5 रिक्टर स्केल की तीव्रता वाला भूकंप निश्चित आएगा।

उत्तराखंड में पूर्व में आए बड़ी तीव्रता वाले भूकंप की बात करें तो 1999 में चमोली में आया भूकंप बड़ा था। उसकी तीव्रता 6.8 मैग्नीट्यूड थीं। वहीं इससे पहले 1991 के उत्तरकाशी में 6.6, 1980 में धारचूला 6.1 मैग्नीट्यूड के भूकंप आ चुके हैं। इसके बाद से बड़ी तीव्रता वाला कोई भूकंप राज्य में नहीं आया है। इस कारण भी वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि उत्तराखंड में आने वाले वर्षों में बड़ा भूकंप आ सकता है। 30 साल बाद बड़े भूकंप की रहती है आशंका

इस बारे में आईआईटी रुड़की (IIT Rurkee) के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिक प्रो. एमएल शर्मा का कहना है कि करीब 30 साल के अंतराल में बड़े भूकंप की आशंका प्रबल हो जाती है। उत्तराखंड में चमोली और उत्तरकाशी में छह मैग्नीट्यूड से अधिक के भूकंप 2000 से पहले के हैं। इसके बाद कोई भूकंप न आने से एक बड़ा गैप बन चुका है। जिससे पृथ्वी के भीतर 6 मैग्नीट्यूड से अधिक के भूकंप के बराबर एनर्जी एकत्र हो रही है, जो कभी भी भूकंप के रूप में बाहर आ सकते हैं।

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